"If Only I Were a Tree" is a thoughtful Hindi poem by Dr. Mulla Adam Ali that celebrates selfless service, kindness, and the beauty of nature. Through the symbolism of a tree, the poem inspires readers to embrace compassion, generosity, and environmental responsibility.
If Only I Were a Tree | Inspirational Hindi Poem on Nature by Dr. Mulla Adam Ali
डॉ. मुल्ला आदम अली की कविता "काश! मैं वृक्ष होता" प्रकृति, परोपकार और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है। कवि ने वृक्ष के निस्वार्थ जीवन को आदर्श मानते हुए प्रेम, त्याग, समानता और सेवा का प्रेरक संदेश दिया है। यह कविता पाठकों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वृक्षों जैसे उदार और परोपकारी बनने की प्रेरणा देती है।
पर्यावरण एवं मानवता पर श्रेष्ठ हिंदी कविता
काश.! मैं वृक्ष होता
रंग बिरंगे पुष्प खिलाता
मन भावन खुशबु फैलाता।
बिन मांगे ही फल देता
कुछ ना अपने लिए बचाता।
परोपकार में होता दक्ष
काश! मै बन जाऊँ वृक्ष।
प्रेम सुधा बरसात सब पर
चाहें खग हो, चाहे चौपाया।
नव जीवन भर देती सब में
मेरी ठंडी, शीतल छाया।
करता न्याय होकर निष्पक्ष
काश!
मैं बन जाऊँ वृक्ष।
- डॉ. मुल्ला आदम अली
हिंदी लेखक, कवि एवं बाल साहित्यकार
तिरुपति, आंध्र प्रदेश
निष्कर्ष; "काश! मैं वृक्ष होता" केवल एक कविता नहीं, बल्कि प्रकृति से प्रेम, निस्वार्थ सेवा और परोपकार का जीवन-संदेश है। डॉ. मुल्ला आदम अली की यह प्रेरक रचना पाठकों को वृक्षों के गुण अपनाकर समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देती है।
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