HAWAI HATHI EVAM ANYA KAHANIYAN by VIMLA RASTOGI
कल्पना, लोकजीवन और जीवन-मूल्यों का कथासंसार
‘हवाई हाथी एवं अन्य कहानियाँ’
बालसाहित्य का उद्देश्य केवल बच्चों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनकी कल्पनाशीलता को विस्तार देना, जिज्ञासा को जाग्रत करना और जीवन को समझने की दृष्टि विकसित करना भी है। बच्चों के लिए लिखी गई कहानियाँ तभी सार्थक बनती हैं, जब वे रोचक घटनाओं के साथ संवेदना, विवेक और मानवीय मूल्यों की जमीन तैयार करें। वरिष्ठ बालसाहित्यकार विमला रस्तोगी का कहानी-संग्रह ‘हवाई हाथी एवं अन्य कहानियाँ’ इसी संदर्भ में ध्यान आकर्षित करता है। संग्रह में आठ कहानियाँ हैं, जिनमें लोककथाओं का जादुई संसार, पौराणिक-धार्मिक प्रसंग, साहसिक घटनाएँ और नैतिक जीवन-दृष्टि अलग-अलग रूपों में सामने आती हैं। इन कहानियों की विशेषता यह है कि वे बालपाठकों को कल्पना की उड़ान देते हुए अच्छे-बुरे, न्याय-अन्याय, त्याग-लोभ और साहस-अहंकार के बीच अंतर समझाने का प्रयास करती हैं।
विमला रस्तोगी हिंदी बालसाहित्य में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके खाते में बालकथा-संग्रहों सहित बीस प्रकाशित कृतियाँ हैं। ‘विश्व की श्रेष्ठ लोक कथाएँ’, ‘मणि की परख’, ‘सपनों का संसार’, ‘दो दूनी चार’, ‘सुनो कहानी’, ‘एक थी राजकुमारी’, ‘तुम फिर आना’ और ‘बच्चों की सतरंगी कहानियाँ’ जैसी कृतियाँ उनके रचनात्मक संसार का परिचय देती हैं। बालकविता, नाटक, जीवनी और अन्य साहित्यिक विधाओं में भी उनका लेखन विस्तृत है। उनकी रचनाओं का पाठ्यपुस्तकों में शामिल होना तथा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के प्रतिष्ठित सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित होना उनके साहित्यिक योगदान को रेखांकित करता है। इस अनुभव की छाप प्रस्तुत संग्रह की कथा-चयन प्रक्रिया और बच्चों के लिए रोचक प्रसंग रचने की प्रवृत्ति में दिखाई देती है।
संग्रह की पहली कहानी ‘प्यासी बुढ़िया’ में राजकुमार और उसके घोड़े के माध्यम से अहंकार, करुणा और दृष्टिकोण में परिवर्तन की कथा कही गई है। अपने सुंदर और शक्तिशाली घोड़े पर गर्व करने वाला राजकुमार एक वृद्ध व्यक्ति के घोड़े का उपहास करता है। जादूगर वृद्ध उसके घोड़े को दुबला बना देता है और शाप से मुक्ति की शर्त भी रखता है। इसके बाद राजकुमार अपने घोड़े की उपेक्षा नहीं करता, बल्कि उसकी देखभाल करता है। एक बीमार वृद्धा को पानी तक पहुँचाने में सहायता करने पर घोड़े को फिर से उसका पुराना रूप मिल जाता है। कहानी का सार इस बात में है कि किसी के मूल्य का निर्धारण केवल बाहरी रूप से नहीं किया जा सकता। जिस घोड़े को राजकुमार कभी अपनी प्रतिष्ठा का प्रतीक समझता था, उसी के प्रति अपनापन और सेवा का भाव उसके जीवन में सुखद परिवर्तन लाता है। कहानी का जादुई परिवेश बालमन को आकर्षित करता है और करुणा को व्यवहार से जोड़ता है। हालाँकि शीर्षक में ‘प्यासी बुढ़िया’ का संकेत कहानी की केंद्रीय घटना से पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता, फिर भी कथा का मूल संदेश सहज रूप से संप्रेषित होता है।
‘नीली झील’ में भाई-बहन के प्रेम, विपत्ति में धैर्य और पारिवारिक संबंधों की शक्ति को लोककथात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। राजकुमार प्रीतपाल और राजकुमारी सुकन्या को सौतेली माँ के षड्यंत्र के कारण अनेक कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। दोनों का बिछुड़ना, अलग-अलग परिस्थितियों में जीवन बिताना और अंततः एक-दूसरे को खोज लेना कथा में कौतूहल बनाए रखता है। मृत माँ की आत्मा का बच्चों की रक्षा के लिए उपस्थित होना कहानी को अलौकिक आयाम देता है। इसमें मातृस्नेह मृत्यु के बाद भी संरक्षणकारी शक्ति के रूप में उभरता है। हालाँकि अनेक संयोगों, दानवी सौतेली माँ और अंत में उसके नाटकीय विनाश के कारण कथा का समाधान कुछ हद तक पारंपरिक तथा सरल दिखाई देता है, फिर भी भाई-बहन के परस्पर लगाव और संकट के सामने साहस बनाए रखने का भाव इसे बालपाठकों के लिए आकर्षक बनाता है।
‘तीन खूंटे’ संग्रह की उन कहानियों में है, जिनमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश स्पष्ट रूप से उभरता है। एक गाँव का जादूगर मुखिया दूसरे गाँव को भयभीत करने के लिए तीन जादुई खूंटे गाड़ देता है और उसकी सीमाएँ निर्धारित करने की धमकी देता है। दूसरे गाँव का मुखिया भय के सामने झुकने के बजाय खूंटों को उखाड़कर जला देता है। इसके बाद जादूगर नदी के जल के सहारे गाँव को डुबोने का प्रयास करता है, लेकिन साहसी मुखिया उसका सामना करता है। यहाँ जादुई घटनाएँ केवल चमत्कार उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और सामूहिक जीवन पर उसके प्रभाव को सामने लाने के लिए प्रयुक्त हुई हैं। कहानी का प्रतिपक्ष स्पष्ट है—एक ओर भय के सहारे प्रभुत्व स्थापित करने की इच्छा, दूसरी ओर अपने अधिकार और अस्तित्व की रक्षा करने का साहस। हालाँकि जादूगर, नदी और जलीय जीवों के बीच संबंध तथा संकट के समाधान की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट किया जाता तो कथा का तार्किक पक्ष मजबूत होता, फिर भी इसका प्रतिरोधी स्वर उल्लेखनीय है।
‘फैसला’ में राजकुमारी केशिनी के स्वयंवर के माध्यम से न्याय, विवेक और त्याग की प्रतिष्ठा की गई है। राजकुमारी सांसारिक वैभव के स्थान पर ऋषिपुत्र सुधन्वा को जीवनसाथी चुनना चाहती है। राजकुमार विरोचन अपने राजसी वैभव और सुख-सुविधाओं के आधार पर श्रेष्ठता का दावा करता है, जबकि सुधन्वा के पक्ष में ऋषि-परंपरा और तप का महत्त्व सामने आता है। विवाद का निर्णय विरोचन के पिता प्रह्लाद करते हैं, जो अपने पुत्र के पक्ष में निर्णय देने के बजाय निष्पक्षता का परिचय देते हैं। इस प्रसंग में न्याय की गरिमा और व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर सत्य का पक्ष लेने की प्रेरणा निहित है। कहानी का महत्त्व इस बात में है कि निर्णय की विश्वसनीयता निर्णायक की निष्पक्षता पर निर्भर करती है। दूसरी ओर, ब्राह्मण और दैत्य की श्रेष्ठता से जुड़ी पारंपरिक धारणाएँ आधुनिक समानतावादी दृष्टि से प्रश्न भी उत्पन्न करती हैं। बालपाठकों के साथ इस कथा पर चर्चा करते हुए उसके नैतिक पक्ष—निष्पक्षता, त्याग और विवेक—को प्रमुखता देना उपयोगी होगा।
‘हवाई हाथी’ में अकबर और उसके प्रिय हाथी हवाई की कथा के माध्यम से साहस, जोखिम और राजसी प्रदर्शन का चित्र उभरता है। अकबर अपने हाथी को रणबाघ नामक विशाल युद्ध-हाथी के सामने उतारता है और स्वयं भी संघर्ष में भाग लेता है। युद्ध के दौरान हवाई संकट में पड़ता है, अकबर पर भी खतरा आता है, लेकिन अंततः रणबाघ पीछे हट जाता है। दर्शकों की प्रशंसा के बीच अतिथि बादशाह को ऐसे जोखिमपूर्ण खेलों से सावधान करता है। अकबर का यह कथन कि खतरों से बादशाह ही जूझ सकता है, उसके साहसी व्यक्तित्व के साथ राजसी आत्मविश्वास को भी सामने लाता है। कहानी में गति, संघर्ष और रोमांच है, जो बालपाठक की रुचि बनाए रखता है। फिर भी यहाँ एक विचारणीय पक्ष है। साहस का अर्थ हर खतरे में कूद पड़ना नहीं होता। हाथियों को आपस में लड़ाने और मनुष्य द्वारा अपनी प्रतिष्ठा के लिए जोखिम उठाने की घटना को केवल वीरता के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसके परिणामों पर विचार करने की गुंजाइश भी है। यह पहलू कहानी को आज के संदर्भ में अधिक अर्थपूर्ण ढंग से पढ़ने का अवसर देता है।
‘बटुआ’ में लोककथा की रहस्यमयता, जादुई घटनाओं और रूपांतरण की परंपरा का उपयोग किया गया है। मिट्टी के खिलौने बनाकर जीवनयापन करने वाली विधवा को एक विचित्र सिर मिलता है, जो उसे जादुई वस्तुओं और अंततः एक राजकुमार से जुड़े रहस्य तक पहुँचा देता है। सोना-चाँदी, जादुई सहायता, पहाड़ को समतल करने की असंभव-सी शर्त और अंत में राजकुमार का वास्तविक रूप सामने आना कथा में कौतूहल बनाए रखते हैं। यह कहानी कल्पना की शक्ति और विपरीत परिस्थितियों में अप्रत्याशित सहायता मिलने की लोकविश्वासपूर्ण धारणा को अभिव्यक्त करती है। लेकिन इसकी घटनाओं में संयोगों की अधिकता भी है। विधवा की आर्थिक विवशता, राजकुमारी के विवाह को लेकर राजा की शर्तें और अंत में जादू के टूटने से समस्या का समाधान—ये सभी प्रसंग पारंपरिक परीकथा की संरचना में आते हैं। आधुनिक बालपाठक के लिए राजकुमारी की इच्छा और निर्णय को अधिक स्थान मिलता तो कथा में मानवीय संबंधों का पक्ष और गहरा हो सकता था।
‘पवन के उपहार’ बेलोरूसी लोककथा है, जिसमें एक निर्धन वृद्ध दंपती की भूख और अभाव से आरंभ होकर कथा जादुई उपहारों, छल और प्रत्युत्तर की रोचक शृंखला में बदल जाती है। पवन के कारण आटा बिखर जाने पर वृद्ध व्यक्ति क्षतिपूर्ति माँगने निकलता है। पवन उसे ऐसी मेजपोश देता है, जो भोजन उपलब्ध करा सकती है; फिर सोना-चाँदी देने वाला भेड़ा और अंततः एक जादुई सींग मिलता है। रास्ते में मिलने वाली धूर्त महिला बार-बार उसके उपहार बदलकर अपने पास रख लेती है। तीसरे उपहार की शक्ति उसी महिला के छल को उसके सामने उजागर कर देती है और वृद्ध अपना सामान वापस पा लेता है। कथा का रोचक पक्ष यह है कि अन्याय का उत्तर सीधे हिंसा या प्रतिशोध से नहीं, बल्कि परिस्थिति को समझकर चतुराई से दिया जाता है। हालाँकि जादुई वस्तुओं से अचानक संपन्न हो जाने का विचार श्रम और आर्थिक वास्तविकता के प्रश्नों को पीछे छोड़ देता है, लोककथा के कल्पनालोक में यह अभाव से मुक्ति की आकांक्षा का प्रतीक भी है। कहानी बच्चों को लालच और धोखाधड़ी के परिणाम समझाने के साथ यह भी दिखाती है कि धैर्य और बुद्धिमत्ता कठिन परिस्थिति में सहायक हो सकते हैं।
‘सच्ची साधना’ में भगवान बुद्ध के शिष्य कस्सप और उनकी पत्नी कपिला की कथा के माध्यम से त्याग, वैराग्य और आध्यात्मिक निष्ठा को केंद्र में रखा गया है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने के बाद भी दोनों के मन में संन्यास की आकांक्षा बनी रहती है। वे परिवार का मोह त्यागकर अलग-अलग मार्गों पर चल पड़ते हैं और कस्सप बुद्ध को अपना गुरु बनाते हैं। गुरु के वस्त्र को ग्रहण करने तथा उनके समान आचरण करने की इच्छा के प्रसंग में कस्सप की श्रद्धा और साधना का संकल्प सामने आता है। कहानी का केंद्रीय विचार यह है कि साधना केवल बाहरी वेश धारण करने से पूरी नहीं होती; उसके लिए आत्मसंयम, त्याग और आचरण की दृढ़ता आवश्यक है। तथापि बालपाठकों के संदर्भ में त्याग की अवधारणा को केवल गृहत्याग से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। सेवा, ईमानदारी, लोभ पर नियंत्रण और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी जीवन में साधना के महत्त्वपूर्ण रूप हैं। इस व्यापक अर्थ में पढ़े जाने पर कहानी का आध्यात्मिक संदेश बच्चों के दैनिक जीवन से जुड़ सकता है।
पूरे संग्रह को एक साथ देखने पर इसकी प्रमुख विशेषता कथावस्तु की विविधता है। कुछ कहानियाँ जादुई लोकविश्वासों पर आधारित हैं, कुछ में राजदरबार और साहसिक संघर्ष का वातावरण है, तो कुछ धार्मिक-नैतिक प्रसंगों के सहारे जीवन-मूल्यों को सामने लाती हैं। लेखिका ने ऐसी घटनाओं और पात्रों का चयन किया है, जिनमें बालपाठक के लिए आश्चर्य, कौतूहल और भावनात्मक जुड़ाव की संभावना है। जादुई मेजपोश, बोलने वाले पशु, रहस्यमय सिर, दानवी सौतेली माँ और तपस्वी शिष्य जैसे प्रसंग बच्चों की कल्पनाशक्ति को सक्रिय कर सकते हैं। साथ ही, कथाओं में करुणा, साहस, न्याय, निष्ठा और लोभ के परिणाम जैसे विषय उन्हें नैतिक प्रश्नों पर विचार करने का अवसर देते हैं।
भाषा की दृष्टि से कहानियों का कथन सामान्यतः सरल और घटनाप्रधान है। संवादों तथा क्रमशः खुलती घटनाओं के कारण पाठक की रुचि बनी रहती है। लोककथा की स्वाभाविक विशेषता के अनुरूप इनका संसार चमत्कार, संयोग और स्पष्ट नैतिक प्रतिफल से निर्मित है। फिर भी संग्रह को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ स्थानों पर घटनाओं के बीच तार्किक संबंधों को स्पष्ट करना, पात्रों की मनःस्थितियों को अधिक स्वाभाविक बनाना और कथानकों की गति में संतुलन रखना उपयोगी होता। इसी प्रकार, जहाँ साहस को जोखिम, श्रेष्ठता को वंश या समुदाय और सुख को जादुई संपदा से जोड़ने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, वहाँ आधुनिक बालदृष्टि से विचार की अतिरिक्त गुंजाइश बनती है। ये प्रश्न संग्रह के महत्त्व को कम नहीं करते, बल्कि इसके पाठ और शिक्षण को अधिक संवादपूर्ण बना सकते हैं।
ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की भूमिका में भी संग्रह की सरलता, कल्पनाशीलता और बालोपयोगिता को रेखांकित किया गया है। वास्तव में, ऐसी कहानियों का मूल्य केवल उनके अंत में मिलने वाली सीख में नहीं, बल्कि उन प्रश्नों में भी है जो वे बच्चों के मन में जगाती हैं। क्या बाहरी रूप देखकर किसी का मूल्य आँकना उचित है? क्या शक्ति का उपयोग दूसरों को डराने के लिए होना चाहिए? क्या न्याय अपने लोगों का पक्ष लेने में है या सत्य का? क्या साहस और लापरवाही एक ही बात हैं? जब इन प्रश्नों पर बच्चों के साथ बातचीत की जाती है, तब कहानी मनोरंजन से आगे बढ़कर विचार और संवेदना का माध्यम बन जाती है।
समग्रतः ‘हवाई हाथी एवं अन्य कहानियाँ’ विमला रस्तोगी के बालसाहित्यिक अनुभव और लोककथात्मक रुचि का परिचायक संग्रह है। इसकी कहानियाँ कल्पना, रोमांच, नैतिक आग्रह और पारंपरिक जीवन-दृष्टि के विविध रूप प्रस्तुत करती हैं। कुछ कथाओं में घटनाओं की विश्वसनीयता और आधुनिक मूल्यों के संदर्भ में पुनर्विचार की आवश्यकता अवश्य महसूस होती है, लेकिन यही पक्ष इन्हें चर्चा और संवाद के लिए उपयोगी भी बनाता है। घरों, विद्यालयों और पुस्तकालयों में इन कहानियों का पाठ बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ मानवीय व्यवहार, न्याय, करुणा और विवेक पर सोचने का अवसर दे सकता है। इस दृष्टि से यह संग्रह बालपाठकों और उनके साथ साहित्य पढ़ने वाले अभिभावकों तथा शिक्षकों के लिए उपयोगी पाठ-सामग्री बन सकता है।
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